भारत का स्वर्णिम गौरव,
केन्द्रीय विद्यालय लायेगा,
तक्षशिला, नालंदा का,
इतिहास लौटकर आयेगा ।
शिक्षा उपवन, के नये फूल
संस्कृति सरिता के नये कूल,
हम ज्योति दीप जागृति प्रभूत,
हट जाओ तम के धूल शूल
तमसो मा ज्योतिर्गमय,(3)
यह मन्त्र विश्व में छायेगा ।
तक्षशिला, नालंदा का इतिहास लौटकर आयेगा ।।
तन अनेक पर एक प्राण,
स्वर अनेक पर एक गान ।
हम कण-कण पर छा छायेंगे,
बनकर भारत का स्वाभिमान ॥
तत् त्वं पूषन् अपावृणु,
तत्त्व पूषन् अपावृणु
तत् त्व पूषन् अपावृणु, का छन्द ज्योति बरसायेगा ।।
भारत का स्वर्णिम गौरव, के
केन्द्रीय विद्यालय लाएगा ।

